-
चंदा के गाॅव मे बादलो की छाॅव मे रौकेट मे बैठ कर हम सैर करने जाएगे हम सैर करके आएगे बाया पैर बाहर निकालो धीरे धीरे इसे घुमाओ और घुमाओ ,खुद ...
-
शाला प्रवेशोत्सव स्लोगन 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 १. कोई न छूटे इस बार, शिक्षा है सबकाअधिकार' ‘ 🎀 २. 'हिन्दु-मुस्लिम, सि...
-
ऑनलाइन हिन्दी साहित्यिक पत्रिकाएं (Online Hindi Literature Magazines) Aha Zindagi अहा जिंदगी, मासिक अर्गला मासिक पत्रिका (Argalaa Maga...
सोमवार, 21 मार्च 2016
B
परेशानियों से भागना आसान होता है
हर मुश्किल ज़िन्दगी में एक इम्तिहान होता है
हिम्मत हारने वाले को कुछ नहीं मिलता ज़िंदगी में
और मुश्किलों से लड़ने वाले के क़दमों में ही तो जहाँ होता है
Pareshaniyon se bhaagna aasaan hota hai
Har mushqil zindagi me ek imtihaan hota hai
Himmat haarne waale ko kuch nahi milta Zindagi me
Aur mushqil se ladne wale ke kadmon me hi to jahan hota hai
ईर्ष्या का बोझ
एक बार एक गुरु ने अपने सभी शिष्यों से अनुरोध किया कि वे कल प्रवचन में आते समय अपने साथ एक थैली में बड़े-बड़े आलू साथ लेकर आएं।
उन आलुओं पर उस व्यक्ति का नाम लिखा होना चाहिए, जिनसे वे ईर्ष्या करते हैं।
जो शिष्य जितने व्यक्तियों से ईर्ष्या करता है, वह उतने आलू लेकर आए।
अगले दिन सभी शिष्य आलू लेकर आए। किसी के पास चार आलू थे तो किसी के पास छह।
गुरु ने कहा कि अगले सात दिनों तक ये आलू वे अपने साथ रखें। जहां भी जाएं, खाते-पीते, सोते-जागते, ये आलू सदैव साथ रहने चाहिए।
शिष्यों को कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन वे क्या करते, गुरु का आदेश था।
दो-चार दिनों के बाद ही शिष्य आलुओं की बदबू से परेशान हो गए। जैसे-तैसे उन्होंने सात दिन बिताए और गुरु के पास पहुंचे।
गुरु ने कहा, ‘यह सब मैंने आपको शिक्षा देने के लिए किया था।
जब मात्र सात दिनों में आपको ये आलू बोझ लगने लगे, तब सोचिए कि आप जिन व्यक्तियों से ईर्ष्या करते हैं, उनका कितना बोझ आपके मन पर रहता होगा।
यह ईर्ष्या आपके मन पर अनावश्यक बोझ डालती है, जिसके कारण आपके मन में भी बदबू भर जाती है,
ठीक इन आलूओं की तरह।
इसलिए अपने मन से गलत भावनाओं को निकाल दो,
यदि किसी से प्यार नहीं कर सकते तो कम से कम नफरत तो मत करो।
इससे आपका मन स्वच्छ और हल्का रहेगा।
यह सुनकर सभी शिष्यों ने आलुओं के साथ-साथ अपने मन से ईर्ष्या को भी निकाल फेंका !?ॐ
शनिवार, 19 मार्च 2016
गुरुवार, 4 फ़रवरी 2016
चिंतन
ऐसे करें चिंतन
आप हर तरह की संभावनाओं के बारे में सोचें।
दिमाग को खुला छोड़ दें और जो भी आपके सामने आए उस पर विचार करें।
वास्तविक विश्लेषण करें, क्योंकि आप स्वयं जानते हैं।
विवेक से काम लेकर असंभव शब्द को अलग कर दें।
सकारात्मक चिंतन पर सकारात्मक प्रेरक 'रॉबर्ट एच. शुलर' के विचारों से प्रेरणा लेना चाहिए। उनके विचारों के अनुसार, 'संभावनापूर्ण चिंतन विचारों का मैनेजमेंट है। औसत मस्तिष्क में हर दिन दस हजार विचार आते हैं।
इनमें से अधिकांश नकारात्मक होते हैं। संभावनापूर्ण चिंतन सकारात्मक विचारों को नकारात्मक विचारों से अलग करता है। संभावनापूर्ण चिंतक हर विचार में यह खोजते हैं कि क्या इसमें संभावना है।' इसीलिए हमेशा अपने सहयोगियों की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
उनका मानना था कि महान व्यक्तियों का जीवन चरित्र बताता है कि उनकी सफलता में उनके सहयोगियों का कितना अधिक स्थान था। उन्होंने कुछ उदाहरण देकर यह बात स्पष्ट की।
मंगलवार, 19 जनवरी 2016
प्रसन्नता
सभी को प्रसन्न करना असंभव
जब आप अपने आसपास मौजूद सभी लोगों को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं तो इस तरह के लक्ष्य को कभी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसे में निराशा आपको घेरे यह बहुत संभव है। इस तरह की स्थिति से उपजने वाली निराशा से खुद को बचाना हो तो आपको अपनी प्रसन्नाता के लिए काम करना चाहिए। अपनी प्राथमिकताएं तय करना बहुत जरूरी है। याद रहे जरूरत से ज्यादा वादे भी हमें हताशा की स्थिति में डाल सकते हैं।
किसी की मदद कीजिए
जब आप खिन्न या हताश महसूस कर रहे हैं तो अपने आसपास किसी की मदद करने का कोई अवसर तलाशिए। दूसरों के साथ जुड़िए। दूसरों की प्रसन्नता के लिए छोटा काम हाथ में लीजिए, आपको अपना जीवन अर्थवान नजर आने लगेगा।
जीवन मूल्यवान लगने लगेगा। हम अक्सर ढर्रे पर चलते हुए भी जीवन का मूल्यांकन करने में असमर्थ हो जाते हैं। हमें लगता है कि जीवन उतनी ही दूर तक है जितना हम देख पा रहे हैं लेकिन जीवन उससे भी आगे है, वहां भी जहां हम नहीं देख पा रहे।
वर्तमान
भूत ना भविष्य केवल वर्तमान
जब भी हम बीती चीजों के बारे में ज्यादा सोचते हैं तो मन में एक अजीब सी उदासी घर कर ही जाती है, इसी तरह भविष्य के बारे में सोचते हुए भी हम आशंकित और डरे हुए रहते हैं। इनका असर हमारे वर्तमान को खराब करता है। अगर हम आज में ही जिएं और आज हम क्या अच्छा कर सकते हैं उस विचार के साथ आगे बढ़ें तो शायद जीवन में निराशा के लिए कोई जगह नहीं होगी।
हम जो नहीं कर पाए उसके लिए उदास क्यों होना, हम आज जो कर सकते हैं उस पर बीते दिनों का असर आखिर क्यों आने देना चाहिए। बीती बातों को भुलाकर अगर आज में ही अपनी उर्जा लगाई जाए तो बेहतर नतीजे हमें आगे बढ़ने को ही प्रेरित करेंगे। कल में अटके रहकर हम अपने आज को भी प्रभावित करते हैं और आने वाले कल को भी।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
विशिष्ट पोस्ट
SOME USEFUL WEBSITES ONLINE EDUCATIONAL SUPPORT
👌SOME USEFUL WEBSITES ONLINE EDUCATIONAL SUPPORT_* www.khanacademy.org www.academicearths.org www.coursera.com www.edx.org www.ope...