गुरुवार, 2 मई 2019

✍🏻 #Preposition....:
1. का, के , कि के अर्थ में सम्बन्ध बताने वाले के लिए :- of
2. 'से' के अर्थ में जुदाई :- from
3. 'से अलग' के अर्थ में :- off
4. दो के बीच में :- between
5. तीन या तीन से अधिक के बीच में:- among
6. 'के करीब' के अर्थ में :- about
7. 'के बारे में' के अर्थ में :- about
8. 'के चारो तरफ' के अर्थ में :- round
9. 'के आस - पास' के अर्थ में :- around
10. 'के प्रति' के अर्थ में:- to, towards
11. 'की ओर' के अर्थ में:- to, towards
12. किसी चीज़ के ऊपर और स्पर्श रहने पर :- on
13. किसी चीज़ के ऊपर और स्पर्श नहीं रहने पर :- above, over
14. किसी चीज़ के ऊपर और गतिशील अवस्था में :- over
15. 'के द्वारा' के अर्थ में :- by
16. व्यक्ति के निकट :- by
17. किसी स्थान के निकट :- at
18. 'से होकर' (भीतरी अवस्था) :- through
19. 'से होकर' (बाहरी अवस्था):- by
20. Parts of Body के साथ धरकर के अर्थ में :- by
21. निश्चित समय के साथ 'तक' के अर्थ में :- by, till
22. समय कि अवधि के साथ 'तक' के अर्थ में :- For
23. निश्चित समय के साथ से के अर्थ में यदि वाक्य Present और Past.Tense में हो:- since
24. निश्चित समय के साथ से के अर्थ में यदि वाक्य Future Tense में.हो :- from
25. समय के अवधि के साथ 'से' के साथ में:- for
26. जितना बजे उतना बताना हो :- at
27. दिन के नाम के साथ 'को' के अर्थ में :- on
28. किसी Instrument के मदद से कोई काम करना हो :- with
29. 'के हिसाब से' के अर्थ में :- by
30. कीमत बताने में :- at
31. गति बताने में :- at
32. तापमान बताने में :- at
33. 'के खिलाफ' के अर्थ में :- against
34. से सटकर या सटाकर के अर्थ में:- against
35. किसी के पास जाना हो :- to
36. के किनारे के अर्थ में :- along
37. के बावज़ूद के अर्थ में :- with, for, in spite of
38. किसी स्थान के निकट या पास के अर्थ में :- at
39. कोई काम करके अर्थ में :- by + v 4
40. कोई काम करते ही के अर्थ में :- on + v 4
41. कोई काम करने के चलते :- for + v 4
42. 'के लिए' के अर्थ में :- for
43. 'के बदले में' के अर्थ में :- for
44. 'के अधीन' के अर्थ में :- under
45. 'में' के अर्थ में स्थिर अवस्था :- in
46. 'में' के अर्थ में गतिशील अवस्था:- into
47. 'के सामने' के अर्थ में यदि व्यक्ति हो :- before
48. 'के सामने' के अर्थ में यदि कोई वस्तु हो :- in front of
49. जब दो भवन आमने - सामने हो :- opposite
50. 'के पीछे' के अर्थ में:- behind
51. 'को छोड़कर' के अर्थ में :- but, except
52. 'के दौरान' के अर्थ में :- during
53. 'के बगल में' के अर्थ में :- beside
54. 'के अलावे के अर्थ में':- besides
55. साधन बताने में 'से' के अर्थ में :- by
56. किसी निर्धारित समय के भीतर :- within
57. किसी निर्धारित समय में :- in
58. नियंत्रण में :- under control
59. नियंत्रण से बाहर में:- out of control
60. समझ से बाहर :- above, beyond
61. समय बताने में घडी के साथ:-by
62. कोई वस्तु किसी चीज़ के ऊपर तथा नीचे कि वस्तु को पूरी तरह से
.ढके हुए हो तो 'पर' के अर्थ में :- under
63. किसी चीज़ को स्पर्श करके पार करे :- across
64. किसी चीज़ को बिना स्पर्श किए हुए पार करे:- over, across
65. कसम खाने में :- by
66. 'के उस पार' के अर्थ में :- across
67. एक छोर से दूसरे छोर तक के अर्थ में:- over, across
68. 'में' के अर्थ में परिवर्तन :- into
69. लक्ष्य बताने में :- at
70. समूचा के अर्थ में :- throughout.

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

एक रोचक तथ्य

!!!एक रोचक तथ्य!!!

जानिए स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने में क्या है अंतर ?

*पहला अंतर*

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर *झंडे को नीचे से रस्सी द्वारा खींच कर ऊपर ले जाया जाता है, फिर खोल कर फहराया जाता है, जिसे *ध्वजारोहण* कहा जाता है क्योंकि यह 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक घटना  को सम्मान देने हेतु किया जाता है जब प्रधानमंत्री जी ने ऐसा किया था। संविधान में इसे अंग्रेजी में *Flag Hoisting (ध्वजारोहण)* कहा जाता है।

जबकि

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर *झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, जिसे खोल कर फहराया जाता है,* संविधान में इसे *Flag Unfurling (झंडा फहराना)* कहा जाता है।
--–----------------------------------
*दूसरा अंतर*

15 अगस्त के दिन *प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वो ध्वजारोहण करते हैं,* क्योंकि स्वतंत्रता के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते है, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। इस दिन शाम को राष्ट्रपति अपना सन्देश राष्ट्र के नाम देते हैं।

जबकि

26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, *इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं*
-----------------------–--------------
*तीसरा अंतर*

स्वतंत्रता दिवस के दिन *लाल किले* से ध्वजारोहण किया जाता है।

जबकि

गणतंत्र दिवस के दिन *राजपथ* पर झंडा फहराया जाता है।

शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

उत्कृष्ट_विद्यालय

#उत्कृष्ट_विद्यालय
****************************
मैं जितने भी अच्छा विद्यालय देखा हूँ. सबमें कुछ उभयनिष्ठ (common) बातें हैं. जैसे - -
1. सभी अध्यापक विद्यालय को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए    चिंतन व कार्य करते हैं ;
2. टीम भावना ;
3. समय पर विद्यालय का खुलना व बंद होना;
4. अध्यापकों में दायित्व का विभाजन ;
5. विद्यालय में घंटी का बजना व समय विभाजन चक्र, पाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तकों के अनुसार शिक्षण - अधिगम ;
5. बच्चों के अधिगम सुनिश्चित करना व सतत व्यापक मूल्यांकन ;
6. कमजोर बच्चों के लिए उपचारात्मक शिक्षण ;
7. कार्य पुस्तिका व नोट बुक का सम्यक मूल्यांकन व सुधार ;
8. उपस्थिति, विद्यालय बेहतरी, सामुदायिक सहयोग हेतु नियमित अभिभावक संपर्क ;
9. विद्यालय में नियमित शैक्षिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन व समुदाय की भागीदारी ;
10. खेल कूद व बालचर की गतिविधि ;
11. प्रार्थना सभा में प्रार्थना,पीटी के अलावा अन्य गतिविधियों का आयोजन ;
12. स्वच्छता व बागवानी ;
13. विद्यालय बजट का कुशल प्रबंधन के अलावा सहयोग प्राप्त करना;
14. बेहतर सामंजस्य ;
15. प्रधानाध्यापक का कुशल नेतृत्व ;
16. विद्यालय की बेहतरी के लिए नियमित नवोन्मेष व क्रियात्मक शोध आदि.

गुरुवार, 10 जनवरी 2019

Computer short cut key


कम्प्यूटर
शार्ट key
CTRL+C = कॉपी
CTRL+X = कट
CTRL+V = पेस्ट
CTRL+Z = अन्डू
DELETE = डिलीट
SHIFT+DELETE = डिलीट (बिना रिसाईकिल बिन रखे)
F2 = रिनेम
CTRL+RIGHT ARROW = कर्सर को अगले शब्द के शुरू में रखता है
CTRL+LEFT ARROW = कर्सर पिछले शब्द के शुरू में रखता है.
CTRL+DOWN ARROW = कर्सर को अगले पैराग्राफ के शुरू में रखता है .
CTRL+UP ARROW = कर्सर को पिछले पैराग्राफ के शुरू में रखता है.
CTRL+A = सेलेक्ट आल
F3 = सर्च
ALT+ENTER = सेलेक्टेड आइटम की प्रोपर्टी
ALT+F4 = एप्लीकेशन विंडो को बंद करता है
ALT+SPACEBAR = एक्टिव विंडो का शोर्टकट मेनू
CTRL+F4 = डाकुमेंट विंडो को बंद करता है
ALT+TAB = खुले हुए आइटम्स के बीच स्विच करता है
ALT+ESC = Cycle जिस क्रम में विंडोस खुले
F4 = एड्रेसबार लिस्ट
CTRL+ESC = स्टार्ट मेनू
F10 = एक्टिवेट मेनूबार
F5 = रिफ्रेश एक्टिव विंडो .
BACKSPACE = बेक
ESC = केंसिल कर्रेंट टास्क
SHIFT जब DVD इन्सर्ट हो = ऑटोरन को रोकता है
TAB = फोकस आगे बढाना
SHIFT+TAB = फोकस पीछे करना
F1 = हेल्प.  
Window = स्टार्ट मेनू
window+BREAK = सिस्टम प्रोपर्टी
window+D = डेस्कटॉप
window+M = मिनिमाईज़ आल
window+Shift+M = रिस्टोर आल
window+E = माय कम्प्युटर
window+F = सर्च
CTRL+ window+F = सर्च कम्प्युटर
window+ L = सर्च कम्प्युटर या स्विच यूजर
window+R = रन डायलोग बॉक्स
window+U = यूटिलिटी मेनेजर
Windows Explorer
END = एक्टिव विंडो का बाटम
HOME = एक्टिव विंडो का टॉप
NUM LOCK+ * = सेलेक्टेड फोल्डर के सभी सबफोल्डर
NUM LOCK+ numeric keypad (+) = सेलेक्टेड फोल्डर का कंटेंट
NUM LOCK+numeric keypad (-) = कोलेप्स सेलेक्टेड फोल्डर
LEFT ARROW = कोलेप्स सेलेक्शन
RIGHT ARROW = डिस्प्ले कोलेप्सड सेलेक्शन
Windows Mediaplayer
≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡
ctrl+o ओपन
ctrl+u ओपन url
ctrl+w क्लोस
ctrl+n नई प्लेलिस्ट
ctrl+d एडिट कर्रेंट प्लेलिस्ट
ctrl+1 फुल मोड़
ctrl+2 स्किन मोड़
alt+enter फुल स्क्रीन
f 5 रिफ्रेश
ctrl+p प्ले/ पाउस
ctrl+s स्टॉप
ctrl+shift+g फास्ट प्ले
ctrl+shift+n नोर्मल प्ले
ctrl+shift+s स्लो प्ले
ctrl+b पिछला
ctrl+f अगला
ctrl+shift+b रिवाईंड
ctrl+shift+f फास्ट फारवर्ड
ctrl+h शफल
ctrl+t रिपीट
ctrl+shift+c केप्शन & subtitle
f10 वोल्यूम अप
f 9 वोल्यूम डाउन
f 8 म्यूट
ctrl+e इजेक्ट
विंडोस कीबोर्ड शोर्टकट
≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡
CTRL+C = कॉपी
CTRL+X = कट
CTRL+V = पेस्ट
CTRL+Z = अन्डू
DELETE = डिलीट
SHIFT+DELETE = डिलीट (बिना रिसाईकिल बिन रखे)
F2 = रिनेम
CTRL+RIGHT ARROW = कर्सर को अगले शब्द के शुरू में रखता है
CTRL+LEFT ARROW = कर्सर पिछले शब्द के शुरू में रखता है.
CTRL+DOWN ARROW = कर्सर को अगले पैराग्राफ के शुरू में रखता है .
CTRL+UP ARROW = कर्सर को पिछले पैराग्राफ के शुरू में रखता है.
CTRL+A = सेलेक्ट आल
F3 = सर्च
ALT+ENTER = सेलेक्टेड आइटम की प्रोपर्टी
ALT+F4 = एप्लीकेशन विंडो को बंद करता है
ALT+SPACEBAR = एक्टिव विंडो का शोर्टकट मेनू
CTRL+F4 = डाकुमेंट विंडो को बंद करता है
ALT+TAB = खुले हुए आइटम्स के बीच स्विच करता है
ALT+ESC = Cycle जिस क्रम में विंडोस खुले
F4 = एड्रेसबार लिस्ट
CTRL+ESC = स्टार्ट मेनू
F10 = एक्टिवेट मेनूबार
F5 = रिफ्रेश एक्टिव विंडो .
BACKSPACE = बेक
ESC = केंसिल कर्रेंट टास्क
SHIFT जब DVD इन्सर्ट हो = ऑटोरन को रोकता है
TAB = फोकस आगे बढाना
SHIFT+TAB = फोकस पीछे करना
F1 = हेल्प.  
Window = स्टार्ट मेनू
window+BREAK = सिस्टम प्रोपर्टी
window+D = डेस्कटॉप
window+M = मिनिमाईज़ आल
window+Shift+M = रिस्टोर आल
window+E = माय कम्प्युटर
window+F = सर्च
CTRL+ window+F = सर्च कम्प्युटर
window+ L = सर्च कम्प्युटर या स्विच यूजर
window+R = रन डायलोग बॉक्स
window+U = यूटिलिटी मेनेजर
Windows Explorer
END = एक्टिव विंडो का बाटम
HOME = एक्टिव विंडो का टॉप
NUM LOCK+ * = सेलेक्टेड फोल्डर के सभी सबफोल्डर
NUM LOCK+ numeric keypad (+) = सेलेक्टेड फोल्डर का कंटेंट
NUM LOCK+numeric keypad (-) = कोलेप्स सेलेक्टेड फोल्डर
LEFT ARROW = कोलेप्स सेलेक्शन
RIGHT ARROW = डिस्प्ले कोलेप्सड सेलेक्शन
Windows Mediaplayer
≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡≡
ctrl+o ओपन
ctrl+u ओपन url
ctrl+w क्लोस
ctrl+n नई प्लेलिस्ट
ctrl+d एडिट कर्रेंट प्लेलिस्ट
ctrl+1 फुल मोड़
ctrl+2 स्किन मोड़
alt+enter फुल स्क्रीन
f 5 रिफ्रेश
ctrl+p प्ले/ पाउस
ctrl+s स्टॉप
ctrl+shift+g फास्ट प्ले
ctrl+shift+n नोर्मल प्ले
ctrl+shift+s स्लो प्ले
ctrl+b पिछला
ctrl+f अगला
ctrl+shift+b रिवाईंड
ctrl+shift+f फास्ट फारवर्ड
ctrl+h शफल
ctrl+t रिपीट
ctrl+shift+c केप्शन & subtitle
f10 वोल्यूम अप
f 9 वोल्यूम डाउन
f 8 म्यूट
ctrl+e इजेक्ट

रविवार, 6 जनवरी 2019

संस्कृत का महत्व

देश में एक ऐसा वर्ग बन गया है जो कि संस्कृत भाषा से तो शून्य हैं परंतु उनकी छद्म धारणा यह बन गयी है कि संस्कृत भाषा में  जो कुछ भी लिखा है वे सब पूजा पाठ के मंत्र ही होंगे जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है।

देखते हैं -

*"चतुरस्रं मण्डलं चिकीर्षन्न् अक्षयार्धं मध्यात्प्राचीमभ्यापातयेत्।*
*यदतिशिष्यते तस्य सह तृतीयेन मण्डलं परिलिखेत्।"*

बौधायन ने उक्त श्लोक को लिखा है !
इसका अर्थ है -

यदि वर्ग की भुजा 2a हो
तो वृत्त की त्रिज्या r = [a+1/3(√2a – a)] = [1+1/3(√2 – 1)] a
ये क्या है ?

अरे ये तो कोई गणित या विज्ञान का सूत्र लगता है

शायद ईसा के जन्म से पूर्व पिंगल के छंद शास्त्र में एक श्लोक प्रकट हुआ था।हालायुध ने अपने ग्रंथ मृतसंजीवनी मे , जो पिंगल के छन्द शास्त्र पर भाष्य है ,
इस श्लोक का उल्लेख किया है -

*परे पूर्णमिति।*
*उपरिष्टादेकं चतुरस्रकोष्ठं लिखित्वा तस्याधस्तात् उभयतोर्धनिष्क्रान्तं कोष्ठद्वयं लिखेत्।*
*तस्याप्यधस्तात् त्रयं तस्याप्यधस्तात् चतुष्टयं यावदभिमतं स्थानमिति मेरुप्रस्तारः।*
*तस्य प्रथमे कोष्ठे एकसंख्यां व्यवस्थाप्य लक्षणमिदं प्रवर्तयेत्।*
*तत्र परे कोष्ठे यत् वृत्तसंख्याजातं तत् पूर्वकोष्ठयोः पूर्णं निवेशयेत्।*

शायद ही किसी आधुनिक शिक्षा में maths मे B. Sc. किये हुए भारतीय छात्र ने इसका नाम भी सुना हो , जबकि यह "मेरु प्रस्तार" है।
परंतु जब ये पाश्चात्य जगत से "पास्कल त्रिभुज" के नाम से भारत आया तो उन कथित सेकुलर भारतीयों को शर्म इस बात पर आने लगी कि भारत में ऐसे सिद्धांत क्यों नहीं दिये जाते।

*"चतुराधिकं शतमष्टगुणं द्वाषष्टिस्तथा सहस्राणाम्।*
*अयुतद्वयस्य विष्कम्भस्यासन्नो वृत्तपरिणाहः॥"*

ये भी कोई पूजा का मंत्र ही लगता है लेकिन ये किसी गोले के व्यास व परिध का अनुपात है। जब पाश्चात्य जगत से ये आया तो संक्षिप्त रुप लेकर आया ऐसा π जिसे 22/7 के रुप में डिकोड किया जाता है।

उक्त श्लोक को डिकोड करेंगे अंकों में तो कुछ इस तरह होगा-
(१०० + ४) * ८ + ६२०००/२०००० = ३.१४१६

*ऋगवेद में π का मान ३२ अंक तक शुद्ध है।*

*गोपीभाग्य मधुव्रातः श्रुंगशोदधि संधिगः |*
*खलजीवितखाताव गलहाला रसंधरः ||*

इस श्लोक को डीकोड करने पर ३२ अंको तक π का मान 3.1415926535897932384626433832792… आता है।

#चक्रीय_चतुर्भुज का क्षेत्रफल:

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त के गणिताध्याय के क्षेत्रव्यवहार के श्लोक १२.२१ में निम्नलिखित श्लोक वर्णित है-

*स्थूल-फलम् त्रि-चतुर्-भुज-बाहु-प्रतिबाहु-योग-दल-घातस् ।*
*भुज-योग-अर्ध-चतुष्टय-भुज-ऊन-घातात् पदम् सूक्ष्मम् ॥*

अर्थ:

त्रिभुज और चतुर्भुज का स्थूल (लगभग) क्षेत्रफल उसकी आमने-सामने की भुजाओं के योग के आधे के गुणनफल के बराबर होता है तथा सूक्ष्म (exact) क्षेत्रफल भुजाओं के योग के आधे में से भुजाओं की लम्बाई क्रमशः घटाकर और उनका गुणा करके वर्गमूल लेने से प्राप्त होता है।

#ब्रह्मगुप्त_प्रमेय:

चक्रीय चतुर्भुज के विकर्ण यदि लम्बवत हों तो उनके कटान बिन्दु से किसी भुजा पर डाला गया लम्ब सामने की भुजा को समद्विभाजित करता है।

ब्रह्मगुप्त ने श्लोक में कुछ इस प्रकार अभिव्यक्त किया है-

*त्रि-भ्जे भुजौ तु भूमिस् तद्-लम्बस् लम्बक-अधरम् खण्डम् ।*
*ऊर्ध्वम् अवलम्ब-खण्डम् लम्बक-योग-अर्धम् अधर-ऊनम् ॥*
(ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त, गणिताध्याय, क्षेत्रव्यवहार १२.३१)

#वर्ग_समीकरण का व्यापक सूत्र:

ब्रह्मगुप्त का सूत्र इस प्रकार है-

*वर्गचतुर्गुणितानां रुपाणां मध्यवर्गसहितानाम् ।*
*मूलं मध्येनोनं वर्गद्विगुणोद्धृतं मध्यः ॥*
ब्राह्मस्फुट-सिद्धांत - 18.44

अर्थात :

व्यक्त रुप (c) के साथ अव्यक्त वर्ग के चतुर्गुणित गुणांक (4ac) को अव्यक्त मध्य के गुणांक के वर्ग (b²) से सहित करें या जोड़ें। इसका वर्गमूल प्राप्त करें तथा इसमें से मध्य अर्थात b को घटावें।
पुनः इस संख्या को अज्ञात ञ वर्ग के गुणांक (a) के द्विगुणित संख्या से भाग देवें।
प्राप्त संख्या ही अज्ञात "त्र" राशि का मान है।

श्रीधराचार्य ने इस बहुमूल्य सूत्र को भास्कराचार्य का नाम लेकर अविकल रुप से उद्धृत किया —

*चतुराहतवर्गसमैः रुपैः पक्षद्वयं गुणयेत् ।*
*अव्यक्तवर्गरूपैर्युक्तौ पक्षौ ततो मूलम् ॥* -- भास्करीय बीजगणित, अव्यक्त-वर्गादि-समीकरण, पृ. - 221

अर्थात :-

प्रथम अव्यक्त वर्ग के चतुर्गुणित रूप या गुणांक (4a) से दोनों पक्षों के गुणांको को गुणित करके द्वितीय अव्यक्त गुणांक (b) के वर्गतुल्य रूप दोनों पक्षों में जोड़ें। पुनः द्वितीय पक्ष का वर्गमूल प्राप्त करें।☺

#आर्यभट्ट की ज्या (Sine) सारणी:

आर्यभटीय का निम्नांकित श्लोक ही आर्यभट की ज्या-सारणी को निरूपित करता है:

*मखि भखि फखि धखि णखि ञखि ङखि हस्झ स्ककि किष्ग श्घकि किघ्व ।*
*घ्लकि किग्र हक्य धकि किच स्ग झश ङ्व क्ल प्त फ छ कला-अर्ध-ज्यास् ॥*

#माधव की ज्या सारणी:

निम्नांकित श्लोक में माधव की ज्या सारणी दिखायी गयी है। जो चन्द्रकान्त राजू द्वारा लिखित *'कल्चरल फाउण्डेशन्स आफ मैथमेटिक्स'* नामक पुस्तक से लिया गया है।

*श्रेष्ठं नाम वरिष्ठानां हिमाद्रिर्वेदभावनः।*
*तपनो भानुसूक्तज्ञो मध्यमं विद्धि दोहनं।।*
*धिगाज्यो नाशनं कष्टं छत्रभोगाशयाम्बिका।*
*म्रिगाहारो नरेशोऽयं वीरोरनजयोत्सुकः।।*
*मूलं विशुद्धं नालस्य गानेषु विरला नराः।*
*अशुद्धिगुप्ताचोरश्रीः शंकुकर्णो नगेश्वरः।।*
*तनुजो गर्भजो मित्रं श्रीमानत्र सुखी सखे!।*
*शशी रात्रौ हिमाहारो वेगल्पः पथि सिन्धुरः।।*
*छायालयो गजो नीलो निर्मलो नास्ति सत्कुले।*
*रात्रौ दर्पणमभ्राङ्गं नागस्तुङ्गनखो बली।।*
*धीरो युवा कथालोलः पूज्यो नारीजरैर्भगः।*
*कन्यागारे नागवल्ली देवो विश्वस्थली भृगुः।।*
*तत्परादिकलान्तास्तु महाज्या माधवोदिताः।*
*स्वस्वपूर्वविशुद्धे तु शिष्टास्तत्खण्डमौर्विकाः।।*
(२.९.५)

#संख्या_रेखा की परिकल्पना (कॉन्सेप्ट्)

*"एकप्रभृत्यापरार्धसंख्यास्वरूपपरिज्ञानाय रेखाध्यारोपणं कृत्वा एकेयं रेखा दशेयं, शतेयं, सहस्रेयं इति ग्राहयति, अवगमयति, संख्यास्वरूम, केवलं, न तु संख्याया: रेखातत्त्वमेव।"*
Brhadaranyaka Aankarabhasya (4.4.25)

जिसका अर्थ है-

1 unit, 10 units, 100 units, 1000 units etc. up to parardha can be located in a number line. Now by using the number line one can do operations like addition, subtraction and so on.

ये तो कुछ नमूना हैं , जो ये दर्शाने के लिये दिया गया है कि संस्कृत ग्रंथो में केवल पूजा पाठ या आरती के मंत्र नहीं है बल्कि तमाम विज्ञान भरा पड़ा है।

दुर्भाग्य से कालांतर में व विदेशी आक्रांताओं के चलते संस्कृत का ह्रास होने के कारण हमारे पूर्वजों के ज्ञान का भावी पीढ़ी द्वारा विस्तार नहीं हो पाया और बहुत से ग्रंथ आक्रांताओं द्वारा नष्ट भ्रष्ट कर दिए गए ।

शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

छग के नाचा पार्टी

��छ.ग. के प्रमुख नाचा पार्टी क नाम��
01. गोपाल बलराम छ.ग. नाचा पार्टी निपानी (बालोद)
02. अजय माला छ.ग. नाचा पार्टी भर्रीटोला (चारामा)
03. राधा कृष्ण छ.ग. नाचा पार्टी दुर्रे बंजारी
04. माटी के सिंदुर छ.ग. नाचा पार्टी हुच्चेटोला
05. ��शिव भोला नाचा पार्टी (चुगलहीन बदरा) करमतरा जालबाँधा (खैरागढ़)मो.न.8120561877, 9926170954��
06. ज्ञान पूजा छ.ग. नाचा  पार्टी मुड़माड़ी
07. चंपा बसन नाचा पार्टी भकुर्रा
08. सत्यम नाचा पार्टी तेंदुआ
09. छ.ग. नाचा पार्टी छेड़िया (बगदई)
10. तुलसी के पूजा नाचा पार्टी कचांदुर
11. जय मा सरस्वती नाचा पार्टी मेढ़ा
12. पूजा के फूल छ.ग.नाचा पार्टी खलारी
13. महतारी के मया छ.ग. नाचा पार्टी चिखली
14. तुलसी के बिरवा नाच पार्टी राहुद
15. ज्ञान-गंगा नाच पार्टी अवेली (पटेवा)
15. गंगा सागर नाचा पार्टी रेंगाकठेरा (बांधाबाजार)
16. माँ अम्बे की खोज छ.ग. नाचा पार्टी हज्जूटोला
17. जय हिंद छ.ग. नाच पार्टी सेतवा कटोरी
18. सरगम छ.ग. नाच पार्टी डोकला(दरगहन
19. भुईयाँ के सिंगार नाचा पार्टी हुच्चेटोला
20. जय मां भवानी छ.ग. नाचा पार्टी सिलतर(बोरी)
21. गुलाब गोंदा छ.ग. नाच पार्टी घोरदा
22. मयारू मैना छ.ग. नाच पार्टी घोरदा
23. मायारु मोर लाटाबोबोड़ नाच पार्टी लाटाबोड़
24. जय माँ सरस्वती नाच पार्टी बरही सांकर
25.जय गंगा मैय्या नाचा पार्टी कुहीखुर्द
26. जय दुर्गे छ.ग. नाच पार्टी करकाभाट
27. मोर मयारु छ.ग. नाच पार्टी टीला(फुण्डहर)
28. छोटकू-बड़कू नाच पार्टी रेंगाकठेरा (जालबाँधा)
29. शिव सुंदर छ.ग. नाच पार्टी ठाकुरटोला
30. माटी के मितान छ.ग.नाच पार्टी मांठ केशला
31. राज भारती छ.ग. नाच पार्टी चिल्हाटी, वडेकसा
32. सुरज चंदा छ.ग. नाचा पार्टी धमदीटोला
33. छोटू-मोटू नाच पार्टी कविराज टोलागाँव
34. दिल का फुल नाच पार्टी कोटरा उदयपुर
35. जय भवानी नाच पार्टी चीरचार, बालोद
35. भुपेश-प्रकाश छ.ग. नाच पार्टी साल्हेटोला
36. अमर किरण नाचा पार्टी सोरम भटगाँव
37. शिव सागर  नाच पार्टी लतमर्रा ,कलकसा
38. गंगा जमुना छ.ग. नाच फ र्टी चिद्दो, डोगरगढ़
39. चंदा अंजोरी छ.ग.नाच पार्टी कन्हारपुरी ,गुरुर
40. संत समाज नाच पार्टी लिटिया सेमरिया
41. शीत बसंत नाच पार्टी  करमतरा
42. जय भारत माता नाच पार्टी रनचिरई, बालोद
43. शंकर भोला नाच पार्टी करमतरा
44. गोपी किशन नाच पार्टी चरोटा, अंगारी
45. बेटा के सुरता नाचा पार्टी भांठागाँव
46. शिव भोला नाचा पार्टी ठाकुरटोला,कोलेन्द्रा
47. जय हरदेवलाल बाबा छ.ग.नाच पार्टी पाड़े डेंगरापार
48. जय माँ दुर्गा छत्तीसगढ़ी नाच पार्टी साराबोंग
49. जय माँ शारदा छत्तीसगढ़ी नाच पार्टी कोसमी कोमाखाॅन
50. जय माँ चण्डी छत्तीसगढ़ी नाच पार्टी  बिरकोनी महासमुन्द
51. कका भतीजा नाचा पार्टी सरायपाली r36r।                                52अमीरी गरीबी नाच पार्टी सोरिटोला अण्डी
53 जय मा शीतला नाचा पार्टी ग्राम नवागांव (क) जिला धमतरी (छ.ग) मो नं 9111985776

शनिवार, 10 नवंबर 2018

जीवन का पाठ

एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे  आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...

उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें  टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची ...

उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ?

हाँ ... आवाज आई ...

फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये ,

फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है , छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा

अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई , अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे ...

फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ  .. अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..

सर ने टेबल के नीचे से  चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित
थोडी सी जगह में सोख ली गई ...

प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया

इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....

टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान , परिवार , बच्चे , मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं ,

छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी , कार , बडा़ मकान आदि हैं , और

रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें , मनमुटाव , झगडे़ है ..

अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती , या  कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते , रेत जरूर आ सकती थी ...

ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...

यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे  और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय  नहीं रहेगा ...

मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है । अपने बच्चों के साथ खेलो , बगीचे में पानी डालो , सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ ,  घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको , मेडिकल चेक - अप करवाओ ...

टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो , वही महत्वपूर्ण है ... पहले तय करो कि क्या जरूरी है ... बाकी सब तो रेत है ..

छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे ..

अचानक एक ने पूछा , सर लेकिन आपने यह नहीं बताया  कि " चाय के दो कप " क्या हैं ?

प्रोफ़ेसर मुस्कुराये , बोले .. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया ...

इसका उत्तर यह है कि , जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे , लेकिन  अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिए।

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